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closing price trading strategy || क्लोजिंग मुल्य ट्रेडिंग रणनीति ||

 closing price trading strategy || क्लोजिंग मुल्य ट्रेडिंग रणनीति ||

Levels    
4.62TGT-4
4
3.62TGT-3
3
Down Side Go MKT2.62TGT-2Golden RatioAlways Book Brofit (100%)
2
Most Hit TGT1.62TGT-1Golden RatioSmall Profit Book (50%)
1
0.62
0.5Entry BuyStop Loss-Sell
Golden Ratio0.38
Natrual Price Range
No Entry Zone
Sideways Market
Stop Loss ZonePriceClose Price
Golden Ratio0.38
0.5Entry SellStop Loss Buy
0.62
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Most Hit TGT1.62TGT-1Golden RatioSmall Profit Book (50%)
2
UP Side Go MKT2.62TGT-2Golden RatioAlways Book Brofit (100%)
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फाइबोनैक्सी अनुपातों (0.382, 0.618, 1.618, 2.618) पर आधारित डे ट्रेडिंग रणनीति


फाइबोनैक्सी अनुपातों का उपयोग व्यापारियों द्वारा विभिन्न प्रकार की रणनीतियों में किया जाता है, जिसमें डे ट्रेडिंग भी शामिल है। ये अनुपात प्राकृतिक घटनाओं और वित्तीय बाजारों में देखे जाने वाले पैटर्न को दर्शाते हैं।

फाइबोनैक्सी अनुपातों पर आधारित डे ट्रेडिंग रणनीति के चरण:

  1. मार्केट ट्रेंड की पहचान करें: सबसे पहले, आप जिस मुद्रा जोड़ी या शेयर में ट्रेड करना चाहते हैं, उसके मार्केट ट्रेंड की पहचान करें। यह अपट्रेंड, डाउनट्रेंड या साइडवेज हो सकता है।
  2. महत्वपूर्ण स्तरों की पहचान करें: एक बार जब आप ट्रेंड की पहचान कर लेते हैं, तो आप फाइबोनैक्सी अनुपातों का उपयोग करके महत्वपूर्ण स्तरों की पहचान कर सकते हैं। ये स्तर संभावित समर्थन या प्रतिरोध स्तर के रूप में कार्य कर सकते हैं।
  3. एंट्री और एग्जिट पॉइंट्स निर्धारित करें: फाइबोनैक्सी स्तरों के आधार पर, आप अपने एंट्री और एग्जिट पॉइंट्स निर्धारित कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, आप एक अपट्रेंड में 0.382 या 0.618 स्तर पर खरीद सकते हैं और 1.618 या 2.618 स्तर पर लाभ बुक कर सकते हैं।
  4. स्टॉप लॉस और टेक प्रॉफिट सेट करें: अपने ट्रेड को प्रबंधित करने के लिए स्टॉप लॉस और टेक प्रॉफिट स्तर सेट करना महत्वपूर्ण है। स्टॉप लॉस आपको नुकसान को सीमित करने में मदद करता है, जबकि टेक प्रॉफिट आपको लाभ बुक करने में मदद करता है।

फाइबोनैक्सी अनुपातों का उपयोग करने के लाभ:

  • पैटर्न पहचान: फाइबोनैक्सी अनुपातों का उपयोग करके आप बाजार में प्राकृतिक पैटर्न की पहचान कर सकते हैं।
  • संभावित समर्थन और प्रतिरोध स्तर: ये अनुपात संभावित समर्थन और प्रतिरोध स्तरों की पहचान करने में मदद करते हैं।
  • रिस्क मैनेजमेंट: स्टॉप लॉस और टेक प्रॉफिट का उपयोग करके आप अपने ट्रेड को प्रबंधित कर सकते हैं।

फाइबोनैक्सी अनुपातों का उपयोग करने के नुकसान:

  • अनुमान: ये अनुपात केवल अनुमान हैं और भविष्य के मूल्य आंदोलनों की गारंटी नहीं देते हैं।
  • अधिक अध्ययन की आवश्यकता: फाइबोनैक्सी अनुपातों का प्रभावी उपयोग करने के लिए आपको इनके बारे में अधिक अध्ययन करने की आवश्यकता हो सकती है।

अंतिम शब्द:

फाइबोनैक्सी अनुपातों पर आधारित डे ट्रेडिंग रणनीति एक लोकप्रिय तकनीक है। हालांकि, यह रणनीति अकेले सफलता की गारंटी नहीं देती है। आपको अन्य तकनीकी विश्लेषण उपकरणों के साथ इन अनुपातों का संयोजन करने की आवश्यकता हो सकती है।


फाइबोनैक्सी अनुपातों का व्यापार में उपयोग: एक विस्तृत विश्लेषण

फाइबोनैक्सी अनुपात एक ऐसा गणितीय उपकरण है जिसका उपयोग व्यापारियों द्वारा बाजार के भावी आंदोलनों का अनुमान लगाने के लिए किया जाता है। ये अनुपात प्रकृति में पाए जाने वाले पैटर्नों पर आधारित होते हैं और माना जाता है कि ये वित्तीय बाजारों में भी लागू होते हैं।

फाइबोनैक्सी अनुपात क्या हैं?

फाइबोनैक्सी अनुपात एक इतालवी गणितज्ञ लेओनार्डो फिबोनैक्सी द्वारा खोजे गए संख्यात्मक अनुक्रम पर आधारित होते हैं। इस अनुक्रम में प्रत्येक संख्या पिछली दो संख्याओं के योग के बराबर होती है। उदाहरण के लिए: 0, 1, 1, 2, 3, 5, 8, 13, 21, 34...

इन संख्याओं के अनुपातों से प्राप्त होने वाले कुछ महत्वपूर्ण फाइबोनैक्सी अनुपात हैं:

  • 0.382: यह अनुपात 3 और 5 के अनुपात से प्राप्त होता है।
  • 0.618: यह अनुपात 5 और 8 के अनुपात से प्राप्त होता है। इसे गोल्डन रेशियो भी कहा जाता है।
  • 1.618: यह अनुपात 8 और 13 के अनुपात से प्राप्त होता है।
  • 2.618: यह अनुपात 13 और 21 के अनुपात से प्राप्त होता है।

व्यापार में फाइबोनैक्सी अनुपातों का उपयोग कैसे किया जाता है?

व्यापारियों द्वारा फाइबोनैक्सी अनुपातों का उपयोग निम्नलिखित तरीकों से किया जाता है:

  1. संभावित समर्थन और प्रतिरोध स्तरों की पहचान:

    • एक प्रवृत्ति के दौरान, कीमत अक्सर इन फाइबोनैक्सी स्तरों पर रुक सकती है या उलट सकती है।
    • उदाहरण के लिए, एक अपट्रेंड में, 0.382 और 0.618 स्तर संभावित समर्थन स्तर के रूप में कार्य कर सकते हैं, जबकि 1.618 और 2.618 स्तर संभावित प्रतिरोध स्तर के रूप में कार्य कर सकते हैं।
  2. लक्ष्य मूल्य निर्धारण:

    • एक बार जब कोई व्यापारी एक व्यापार में प्रवेश कर जाता है, तो वह फाइबोनैक्सी स्तरों का उपयोग अपने लाभ लक्ष्य निर्धारित करने के लिए कर सकता है।
  3. रिस्क मैनेजमेंट:

    • फाइबोनैक्सी स्तरों का उपयोग स्टॉप लॉस स्तर निर्धारित करने के लिए भी किया जा सकता है।

फाइबोनैक्सी अनुपातों का उपयोग करने के लाभ

  • पैटर्न पहचान: यह बाजार में प्राकृतिक पैटर्न की पहचान करने में मदद करता है।
  • संभावित समर्थन और प्रतिरोध स्तर: यह संभावित समर्थन और प्रतिरोध स्तरों की पहचान करने में मदद करता है।
  • रिस्क मैनेजमेंट: यह व्यापारियों को अपने जोखिम को प्रबंधित करने में मदद करता है।

फाइबोनैक्सी अनुपातों का उपयोग करने के नुकसान

  • अनुमान: ये अनुपात केवल अनुमान हैं और भविष्य के मूल्य आंदोलनों की गारंटी नहीं देते हैं।
  • अधिक अध्ययन की आवश्यकता: फाइबोनैक्सी अनुपातों का प्रभावी उपयोग करने के लिए आपको इनके बारे में अधिक अध्ययन करने की आवश्यकता हो सकती है।

निष्कर्ष

फाइबोनैक्सी अनुपात एक उपयोगी उपकरण हो सकता है, लेकिन यह अकेले व्यापार की सफलता की गारंटी नहीं देता है। इसे अन्य तकनीकी विश्लेषण उपकरणों के साथ संयोजित करके बेहतर परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं।

ध्यान दें: व्यापार में जोखिम शामिल है। किसी भी निवेश निर्णय लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श करें।



Price Action Trading Strategies

Optimal closing price trading strategy | 

How to Trade Stocks Using Daily Closing Prices


Close Price Strategy
It considers the user-assigned level of market risk, the user-defined target percentage of volume, and the volatility of the stock in determining how long before the close it should start executing the trade, and the pace at which the trade should be executed.

How does the open high, low, and close price of a stock help in the next day for intraday trading?

CLOSING PRICE DEFINITION, MEANING & CALCULATION


The closing price of a stock is the price at which the share closes at the end of trading hours of the stock market. It is not to be confused with the last trading price or LTP, which is the final price at which the stock was traded before the markets closed.

In simple terms, the closing price is the weighted average of all prices during the last 30 minutes of the trading hours. Whereas the previous trading price is the final price at which the stock was traded before the market closed for the day.

How is the closing price calculated?

There are two primary stock markets in India—BSE (formerly Bombay Stock Exchange) and National Securities Exchange of India (NSE). Both markets close trading at 3:30 PM.

To know the closing price of a stock, you need to know all the prices at which it was traded between 3 PM and 3:30 PM. Here’s an example for calculating the closing price of stock A.

At 3 PM, the two shares of stock A were traded at Rs. 10 a share. At 3:10 PM, two more shares were traded at Rs. 12. At 3:20 PM one share of stock A was trading at Rs. 11. At 3:30 PM the price went up to Rs. 20 a share and two shares were traded.

Now to calculate the closing price, first multiply the number of shares to the price at the particular time. So, at 3 PM the total product is Rs. 20 (two shares multiplied by Rs. 10), at 3:10 PM the total is Rs. 24, at 3:20 PM it is Rs. 11 and at 3:30 PM it is Rs. 40. Add these values to find out the total product traded in the last 30 minutes: Rs. 95.

The closing price is calculated by dividing the total product by the total number of shares traded during the 30 minutes. So your closing price is Rs 13.57 (Rs. 95/7).

You last trading price is, however, Rs 20, which is the price at which the stock was traded last.

Can closing price and last trading price be the same?

As explained above, the closing price and last trading price are quite different. However, in one particular instance, the closing price can be the same as the previous trading price.

If no shares of a particular stock are traded in the last 30 minutes of the market, the last trading price becomes the closing price.

Let us retake the previous example to understand it better. At 2 PM, three shares of stock A were traded at Rs 10. At 2:45 PM, five shares of stock A were traded at Rs 20. No more shares are traded until the market closes at 3:30 PM.

In this case, the closing price and last trading price will be Rs 20.

Why is closing price important?

If you are a market watcher, the closing price is as essential for you as the opening price, which is the price at which the stock opens in the market.

The closing price of a stock is a reference point for you to understand how a share behaves. You can study the closing price of price over some time, such as a month or even a year. Doing so will help you determine how well the stock has done over time and make an informed investment decision.

Conclusion

The closing price of stocks is essential not just to investors. Financial institutions also observe closing prices and make policy decisions. If you are planning to diversify your investment portfolio, learn to analyse the closing price and reap the rewards.







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